अशोक वृक्ष एक जंगल का पेड़ है। पेड़ अपने औषधीय गुणों के लिए लोकप्रिय है। मिश्रित कार्बनिक कैल्शियम, टैनिन, स्टीरोल और कैटेकॉल छाल में निहित हैं। अशोक कफ और पित्त को शांत करता है और कफ़ और पिटा की संतानता से उत्पन्न सभी समस्याओं के प्रबंधन में उपयोगी होता है। इसमें एस्ट्रोजेनिक यौगिक केटोओस्टेरोल शामिल है जो मासिक धर्म संबंधी विकार के विरूद्ध प्रभावी होता है, जैसे डिस्मेनोरहाइआ इ.सी. अशोक पाचन और आत्मसात में सुधार भी करता है।
मासिक धर्म चक्र को विनियमित करने के लिए और अन्य
स्त्रीरोग संबंधी विकारों का इलाज करना अशोक छाल का कशेरापका बनाओ 500 मिलीलीटर
गाय के दूध और 500 मिलीलीटर पानी में 6 ग्राम अशोक छाल को उबाल लें, जब तक यह आधे से कम नहीं हो जाता। कुछ चीनी जोड़ें
और इसे फिल्टर करें इसे नियमित रूप से पीना, हर तीन महीनों में सामान्य मासिक धर्म के लिए इसे रोजाना 3 दिन पीने का सुझाव
दिया जाता है।
मुंहासे: 100 अशोका पावडर को 2 गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक कि यह एक कप न हो जाए। फिर इसमें ½ कप सरसों का तेल मिक्स करें और ठंडा कर के चेहरे पर लगाएं। इसे तब तक लगाना है जब तक कि आपको मुंहासों से छुटकारा ना मिले।
कैसे करें उपयोग: अशोका दोनों ही रूपों, तरल पदार्थ और पावडर के रूप में उपलब्ध है। आप इसे किसी डॉक्टर से परामर्श ले कर प्रयोग कर सकते हैं।
सफेद प्रदर रोग में
सफेद प्रदर की समस्या बेहद कष्टदायक होती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए अशोक की छाल के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ एक-एक चम्मच दिन में तीन बार लें। एैसा कुछ सप्ताह तक करने से श्वेत प्रदर रोग खत्म होने लगता है।
सफेद प्रदर की समस्या बेहद कष्टदायक होती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए अशोक की छाल के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ एक-एक चम्मच दिन में तीन बार लें। एैसा कुछ सप्ताह तक करने से श्वेत प्रदर रोग खत्म होने लगता है।
गर्भधारण की परेशानी
जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में बार-बार परेशानी आ रही हो वे अशोक के फूल की 2 से 3 ग्राम मात्रा दही में डालकर सेवन करें। इसके नियमित सेवन करने से बिना किसी दिक्कत के स्त्री का गर्भ स्थापित हो जाता है।
जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में बार-बार परेशानी आ रही हो वे अशोक के फूल की 2 से 3 ग्राम मात्रा दही में डालकर सेवन करें। इसके नियमित सेवन करने से बिना किसी दिक्कत के स्त्री का गर्भ स्थापित हो जाता है।
पेशाब की परेशानी
पेशाब संबंधी किसी भी परेशानी को दूर करने के लिए अशोक के बीजों को पानी में पीसकर नियमित रूप से 2 चम्मच की मात्रा पीने से पेशाब रूकने की समस्या और पथरी की परेशानी में आराम मिलता है।
पेशाब संबंधी किसी भी परेशानी को दूर करने के लिए अशोक के बीजों को पानी में पीसकर नियमित रूप से 2 चम्मच की मात्रा पीने से पेशाब रूकने की समस्या और पथरी की परेशानी में आराम मिलता है।
फोड़े-फुंसी दूर करे
फोड़े और फुंसी को दूर करने के लिए अशोक की छाल को पानी में उबालें और जब यह गाढ़ा हो जाए तब इसमें थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर इसे फोड़े और फुंसीयों पर लगाएं।
फोड़े और फुंसी को दूर करने के लिए अशोक की छाल को पानी में उबालें और जब यह गाढ़ा हो जाए तब इसमें थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर इसे फोड़े और फुंसीयों पर लगाएं।
पथरी रोग में
अशोक के 2 ग्राम बीजों को पानी के साथ पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में पीने से पथरी के दर्द में आराम मिलता है।
अशोक के 2 ग्राम बीजों को पानी के साथ पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में पीने से पथरी के दर्द में आराम मिलता है।
हड्डी टूटने पर
हड्डी टूटने पर अशोक के पेड़ की छाल का 6 ग्राम चूर्ण दूध के साथ सुबह शाम लेने से टूटी हड्डी और उसमें होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
हड्डी टूटने पर अशोक के पेड़ की छाल का 6 ग्राम चूर्ण दूध के साथ सुबह शाम लेने से टूटी हड्डी और उसमें होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
अशोक के पाउडर खरीद ने केलिए निचे दिए गए वेबसाइट का प्रयोग करे

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