Wednesday, 29 March 2017

आयुर्वेद मैं लोढ़रा (Lodhra) हर्ब को दिव्या औषधि कहा जाता है



आयुर्वेद में, लोढ़रा Lodhra को दिव्य औषधि कहा जाता है। इसका उपयोग पित्त को शांत करने और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। लोढ़ा ने पिटा और कफ को संतुलित किया इसमें विरोधी anti inflammatory गुण हैं यह शरीर को विसर्जित करने और ऊतकों को रूपांतरित करने में मदद करता है। यह व्यापक रूप से महिला स्त्रीरोग संबंधी (gynaecological disorders)  विकारों में उपयोग किया जाता है।

संकेत और उपयोग (Indication And Uses)
  • लोढ़रा का विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए उपयोग किया जाता है।
  • मेनोराघिया (मासिक धर्म चक्र के दौरान अत्यधिक खून बह रहा) जैसे रोगों में, यह अत्यधिक प्रभावी है क्योंकि यह गर्भाशय के ऊतकों को आराम देता है और आराम से श्लेष्म झिल्ली पर काम करता है।
  • लोधरा रोग (सफेद निर्वहन) जैसे रोगों में बहुत उपयोगी साबित हुआ है।
  • लोढ़रा हर्ब डिलीवरी के बाद महिलाओं के लिए फायदेमंद है।
  • लोढ़ा खून को खारिज करने में मदद करता है (detoxify the blood)
  • Lodhra शरीर के आकार को बनाए रखने में मदद करता है। (shape of the body)
  • यह स्पष्ट रूप से आयुर्वेदिक ग्रंथों में उल्लिखित है जो लोढ़ा शरीर को आकर्षक और त्वचा चमक बनाने में मदद करता है।
  • लोढ़रा लीपा (पेस्ट) फार्म त्वचा रोगों जैसे कुष्ठ रोगों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है।
  • खांसी का इलाज करने के लिए चीनी, घी और लेम्ढा के पत्तों का पेस्ट का उपयोग किया जाता है
  • दिन में दो बार गर्म पानी से 3-5 ग्राम लोढ़रा पाउडर लेकोरिया (leucorrhea) में मददगार होता है।


दुष्प्रभाव (Side Effects)

वृक्ष लोढ़रा का कोई साइड इफेक्ट नहीं है

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